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नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई 2025 को रिलीज होने वाली फिल्म 'उदयपुर फाइल्स कन्हैयालाल लाल टेलर मर्डर' की रिलीज के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया. यह याचिका 2022 में उदयपुर के एक दर्जी कन्हैया लाल तेली हत्याकांड के एक आरोपी ने दायर की थी. याचिकाकर्ता ने फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बुधवार को याचिका पर सुनवाई की. पीठ ने वकील से कहा कि 14 जुलाई को अदालतें फिर से खुलने पर इस मामले का उल्लेख किया जाना चाहिए. आरोपी मोहम्मद जावेद के वकील ने दलील दी कि तब तक हिंदी फिल्म रिलीज हो जाएगी और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्रभावित होगा. पीठ ने स्पष्ट किया कि वह इस मामले पर तत्काल सुनवाई के लिए इच्छुक नहीं है. कहा, "इसे रिलीज़ होने दीजिए..."
याचिका में तर्क दिया गया कि फिल्म सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ है और इससे चल रही न्यायिक कार्यवाही पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. इसमें यह भी तर्क दिया गया कि मामले से जुड़ी घटनाओं पर आधारित बताई जा रही इस फिल्म की स्क्रीनिंग निष्पक्ष सुनवाई के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगी. याचिकाकर्ता ने मामले की सुनवाई पूरी होने तक फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग की.
एक अलग मामले में, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी फिल्म की रिलीज के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है. इस मुस्लिम संस्था ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) द्वारा जारी प्रमाणपत्र की वैधता को चुनौती दी है.
जून 2022 में कथित तौर पर मोहम्मद रियाज़ और मोहम्मद ग़ौस ने कन्हैया लाल की बेरहमी से हत्या कर दी थी. इस वीभत्स कृत्य को कथित तौर पर आरोपियों ने रिकॉर्ड भी किया था. इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था. मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने की. आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और आईपीसी के तहत अपराध दर्ज किए गए. वर्तमान में जयपुर की विशेष एनआईए अदालत में मुकदमा चल रहा है.
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